गाजीपुर । शासन द्वारा केंद्र पर प्रसव कराने एवं स्वास्थ्य मुहैया कराने के तमाम योजनाओं को बढ़ावा देने के लिए लाखों करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। बावजूद इसके महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
मानवता को शर्मसार कर देने वाला ऐसा ही एक मामला सामुदायिक स्वास्थ केंद्र भदौरा पर आया है। जहां परिवार नियोजन के तहत बंध्याकरण कराने के पश्चात महिलाओं को जमीन पर दरी बिछाकर ही लिटा दिया गया इस दौरान वहां किसी स्टाफ और स्वास्थ कर्मी का ना होना और भी झकझोर देता है। परिवार की महिलाओं द्वारा दर्द से कराहती महिलाओं का देखभाल किया जा रहा था। मंगलवार को परिवार नियोजन के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भदौरा पर महिलाओं का बंध्याकरण कार्यक्रम प्रस्तावित था। जिसके क्रम में सर्जन चिकित्सकों के द्वारा पंजीकृत महिलाओं का बंध्याकरण किया गया। गौरतलब हो कि शासन द्वारा महिलाओं का बंध्याकरण कराने के पश्चात उन्हें एंबुलेंस के जरिए घर तक छोड़ने का प्रावधान है। इस दौरान संबंधित महिला और आशा को बंध्याकरण से पूर्व चाय बिस्किट भी देना है। लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्यय केंद्र भदौरा पर हॉस्पिटल स्टाफ एवं अन्य कर्मचारियों के द्वारा बंध्याकरण के बाद करीब आधा दर्जन महिलाओं को जमीन पर दरी बिछाकर ही लिटा दिया गया। जब परिवार की महिलाओं से इसकेेे बारे में पूछा गया तो उन्होंने रोते हुए बताया कि कर्मचारियों केे द्वारा उन्हें बेड की जगह जमीन पर ही लिटाया गया है।


इस बाबत एसीएमओ डॉ डीपी सिन्हा ने बताया कि बंध्याकरण के बाद सभी महिलाओं को बेड पर ही लिटाया जाना है अगर जमीन पर लिटाया गया है तो यह सरासर गलत है। दोषियों के विरुद्ध जांच उपरांत करवाएं कराई जाएगी।

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