Thursday, April 25, 2024
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“झूठे देखावेल भोर” का विमोचन

गाजीपुर। साहित्य चेतना समाज के तत्वावधान में चेतना-प्रवाह के अन्तर्गत पंडित गौरीशंकर मिश्र “मुक्त” की जयंती पर डां अक्षय पाण्डेय द्वारा सम्पादित मुक्त जी के भोजपुरी गीतों का संग्रह “झूठे देखावेल भोर” का विमोचन आज विश्वकर्मा जयंती 17 सितम्बर दिन रविवार को रेवतीपुर स्थित गदाधर श्लोक महाविद्यालय के सभागार में आयोजित किया गया। सर्वप्रथम माँ सरस्वती के चित्र पर दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व अपर मंडलायुक्त ओम धीरज थे। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार/ नवगीतकार हिमांशु उपाध्याय व कुमार निर्मलेन्दु सयुंक्त रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन नवगीतकार अक्षय पाण्डेय तथा अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार अनत कुमार पाण्डेय ” अनंत ने किया। आयोजक मुक्त जी के पुत्रों विनोद कुमार मिश्र व मनोज कुमार मिश्र ने उपस्थित लोगों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

इस कार्यक्रम में कवि हरि नारायण हरिश, विश्व मोहन शर्मा, विनय राय ‘बबुरंग’, कुमार शैलेंद्र, कामेश्वर द्विवेदी, डां रामनारायण तिवारी, डां रामचंद्र दूबे, डां कमलेश राय, डां विनय कुमार दूबे, डां ऋचा राय, गोपाल गौरव, डा संतोष कुमार तिवारी, फजीहत गहमरी सहित अनेक कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से लोगों का मनोरंजन किया। इस मोके पर विश्व हिन्दू परिषद के जिलाध्यक्ष विनोद उपाध्याय, पूर्व जिलाध्यक्ष ओंकार राय, मृतुजंय राय अमर, प्रवीण शुक्ल, अवध बिहारी राय, प्रवीण राय, प्रदीप उपाध्याय,संजय उपाध्याय, गोपाल जी उपाध्याय, चंद्रमास उपाध्याय ‘सोनू’ सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।

विमोचन समारोह और कवि-गोष्ठी इन दो सत्रों में विभक्त इस समारोह के अध्यक्ष भोजपुरी के वरिष्ठ कवि अनन्तदेव पाण्डेय ‘अनन्त’,मुख्य अतिथि ओम धीरज ,वरिष्ठ नवगीतकार,अपर मण्डलायुक्त(से.नि.), वाराणसी एवं विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ नवगीतकार, वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु उपाध्याय रहे। प्रथम सत्र का संचालन युवा नवगीतकार डॉ.अक्षय पाण्डेय एवं द्वितीय सत्र का संचालन कवि मिथिलेश गहमरी ने किया।
मंच की शास्त्रीय औपचारिकताओं के पश्चात् कार्यक्रम का शुभारंभ मुक्त जी द्वारा विरचित ‘आओ माॅं मानस में आओ’ गीत से हुआ,जिसका सुमधुर गायन र मनोज कुमार मिश्र ने किया। अतिथि गण, विद्वत्जन एवं गणमान्य ग्रामवासियों की उपस्थिति में ‘झूठे देखावेलs भोर’ पुस्तक का भव्य विमोचन हुआ। मुक्त जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने उन्हें जनपक्षीय चेतना का महान कवि कहा।मुक्त जी की रचनाओं में विषय-वैविध्य के साथ वैचारिक गहराई है ऐसा सभी वक्ताओं ने एक स्वर में स्वीकार किया। भोजपुरी एवं हिन्दी दोनों भाषाओं में समान गति से महत्वपूर्ण लेखन के लिए वक्ताओं ने उनकी भूरिश: प्रशंसा की‌।उनकी भोजपुरी गीतों के विद्वतापूर्ण सम्पादन के लिए डॉ.अक्षय पाण्डेय की सभी ने सराहना की। वक्ताओं में ओम धीरज, डॉ.विनय कुमार दूबे डॉ.रामनारायण तिवारी, डॉ.रामचन्द्र दूबे,विश्वविमोहन शर्मा, डॉ.ऋचा राय, डॉ.सन्तोष तिवारी, प्रवीण शुक्ल आदि ने अपने विचार रखे।
दूसरे सत्र में कवियों ने अपनी गीत-कविताओं के द्वारा पूरे परिवेश को रसमय बना दिया। श्रोताओं की तालियों से रह-रह कर सभागार गुंजायमान होता रहा। कवियों में अनन्त देव पाण्डेय ‘अनन्त’,हरिनारायण हरीश,ओम धीरज,डॉ.कमलेश राय, कुमार शैलेन्द्र, कामेश्वर द्विवेदी,मिथिलेश गहमरी,विनय राय ‘बबुरंग’, अमरनाथ तिवारी ‘अमर’, डॉ.अक्षय पाण्डेय, गोपाल गौरव, मृत्युंजय राय ‘अमर’आदि ने काव्यपाठ किया। इस संगोष्ठी में श्रोता के रूप में डॉ.प्रभाशंकर पाण्डेय, डा.स्वाति मिश्र, विनोद कुमार मिश्र, मनोज कुमार मिश्र,परमहंस राय, जितेन्द्र मिश्र, शिवम् पाण्डेय आदि उपस्थित रहे।अन्त में संस्था के संगठन सचिव प्रभाकर त्रिपाठी ने समस्त सहभागी वक्ता-कवि गण एवं आगंतुक श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। - प्रभाकर त्रिपाठी संगठन सचिव साहित्य चेतना समाज गाजीपुर।

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