Tuesday, March 5, 2024
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मिट्टी में मिला दे कि जुदा हो नहीं सकता
अब इस से ज़यादा मैं तेरा हो नहीं सकता

मुनव्वर राणा के निधन पर विशेष

सिरफिरे लोग हमें दुश्मन-ए-जां कहते हैं
             हम तो इस मुल्क की मिट्टी को भी माँ कहते हैं। माँ को लेकर दर्जनों शायरी से मशहूर शायर मुनव्वर राणा  का रविवार को निधन हो गया. जानकारी के मुताबिक, 71 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली. लखनऊ स्थित संजय गांधी परास्नातक आयुर्विज्ञान संस्थान में उनका पिछले कुछ वक्‍त से इलाज चल रहा था. मुनव्वर राणा को साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था. हालांकि सरकार से नाराज़गी जताते हुए उन्होंने अपना अवॉर्ड वापस करने का ऐलान किया था. मुनव्वर राणा लंबे समय से बीमार थे. उन्‍हें गले का कैंसर था. 

उनकी बेटी सोमैया ने बताया कि राणा को सोमवार को उनकी वसीयत के मुताबिक लखनऊ में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा. राणा के परिवार में उनकी पत्नी, पांच बेटियां और एक बेटा है।राना के बेटे तबरेज राणा ने बताया, ‘‘बीमारी के कारण वह कई दिनों से अस्पताल में भर्ती थे. उन्हें पहले लखनऊ के मेदांता और फिर एसजीपीजीआई में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने रविवार रात करीब 11 बजे अंतिम सांस ली.”

7 एक क़िस्से की तरह वो तो मुझे भूल गया
         इक कहानी की तरह वो है मगर याद मुझे

मुनव्‍वर राणा का जन्‍म 26 नवंबर, 1952 को उत्तर प्रदेश के रायबरेली में हुआ था। उन्‍हें उर्दू साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाना जाता है. 2014 में कविता ‘शहदाबा’ के लिए उन्‍हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।उनकी शायरी बेहद सरल शब्दों पर आधारित हुआ करती थी, जिसने उन्हें आम लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया।


मुनव्वर राणा के निधन पर कई नामचीन हस्तियों ने शोक जताया है। इनके कुछ मशहूर शेर निम्न हैं :

तुम्हारी आँखों की तौहीन है ज़रा सोचो 
          तुम्हारा चाहने वाला शराब पीता है 

2 आप को चेहरे से भी बीमार होना चाहिए
          इश्क़ है तो इश्क़ का इज़हार होना चाहिए

3 अपनी फजा से अपने जमानों से कट गया 
            पत्‍थर खुदा हुआ तो चट्टानों से कट गया 

4 बदन चुरा के न चल ऐ कयामते गुजरां 
           किसी-किसी को तो हम आंख उठा के देखते हैं 

5 झुक के मिलते हैं बुजुर्गों से हमारे बच्चे
           फूल पर बाग की मिट्टी का असर होता है 

6 कोई दुख हो, कभी कहना नहीं पड़ता उससे 
           वो  जरूरत हो तलबगार से पहचानता है 

8  भुला पाना बहुत मुश्किल है सब कुछ याद रहता है
          मोहब्बत करने वाला इस लिए बरबाद रहता है

9 हम कुछ ऐसे तेरे दीदार में खो जाते हैं
         जैसे बच्चे भरे बाज़ार में खो जाते हैं

10  अँधेरे और उजाले की कहानी सिर्फ़ इतनी है
            जहाँ महबूब रहता है वहीं महताब रहता है

11 किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आई
          मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से में माँ आई

12  मिट्टी में मिला दे कि जुदा हो नहीं सकता
           अब इस से ज़यादा मैं तेरा हो नहीं सकता

13 वो बिछड़ कर भी कहाँ मुझ से जुदा होता है
          रेत पर ओस से इक नाम लिखा होता है

14 मैं भुलाना भी नहीं चाहता इस को लेकिन
         मुस्तक़िल ज़ख़्म का रहना भी बुरा होता है

15  ये हिज्र का रस्ता है ढलानें नहीं होतीं
         सहरा में चराग़ों की दुकानें नहीं होतीं

16  नये कमरों में अब चीजें पुरानी कौन रखता है
          परिंदों के लिए शहरों में पानी कौन रखता है

17  मोहाजिरो यही तारीख है मकानों की
           बनाने वाला हमेशा बरामदों में रहा

18  तुझसे बिछड़ा तो पसंद आ गयी बे-तरतीबी
           इससे पहले मेरा कमरा भी ग़ज़ल जैसा था

19  तुझे अकेले पढूँ कोई हम-सबक न रहे
           मैं चाहता हूँ कि तुझ पर किसी का हक न रहे

20   सिरफिरे लोग हमें दुश्मन-ए-जां कहते हैं
             हम तो इस मुल्क की मिट्टी को भी माँ कहते हैं

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