Monday, February 26, 2024
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पी.जी. कॉलेज के शिक्षक संघ के महामंत्री की व्यथा

महामंत्री, महाविद्यालय शिक्षक संघ, पी.जी. कॉलेज,गाज़ीपुर

महामंत्री चुने जाने के समय से आज तक शिक्षकों से संवाद और स्वयं के प्रेक्षण और अनुभव के आधार पर महाविद्यालय प्रशासन के समक्ष कई मुद्दें /समस्याएँ मैंने रखा हैं,जिनमें से प्रमुख निम्नलिखित हैं।इन्हें मौखिक रूप से आमने-सामने और महाविद्यालय शिक्षक संघ के व्हाट्सएप ग्रुप में कई बार महाविद्यालय प्रशासन के समक्ष रख चुका हूँ।सभी के संज्ञान में है, इन्हें आमसभा के समक्ष भी रखा जाना है।।

कृपया शिक्षक साथी मुद्दों/समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करें, लंबे समय में उत्पन्न और लंबे समय से चली आ रही समस्याएँ समाधान में समय लेती हैं🙏🏻

  1. एक व्यक्ति के पास एक पद हो।विशेष योग्यता और आवश्यकता पर दूसरा पद अल्प अवधि के लिए हो।

एक व्यक्ति को समिति/प्रकोष्ठ/केंद्र के कई पद या चार-चार पद कैसे? कई वरिष्ठ प्रोफेसर और शिक्षक हैं,जिनके पास एक भी पद नहीं है।

प्राचार्य जी से संबंध या नजदीकी के नाम पर संस्था में अंदर इस तरह की व्यवस्था स्वीकार्य नहीं है।

  1. समिति/प्रकोष्ठ/केंद्र में प्रभारी/सदस्य/संयोजक/समन्वयक नियुक्ति में वरिष्ठता,संकाय और विभाग देखकर पद और सदस्यता का नहीं होना स्पष्ट है।इसमें रोटेशन का अभाव है।
  2. विधिक रूप से निर्धारित स्नातक शिक्षक परास्नातक कोर्स का परीक्षा प्रश्न-पत्र नहीं बना सकते, मूल्यांकन नहीं कर सकते, अध्ययन परिषद में नहीं रह सकते, मिड-टर्म तक नहीं ले सकते और उसका मूल्यांकन नहीं कर सकते,भले ही उस विभाग में स्ववित्तपोषित परास्नातक कोर्स चल रहा हो।
    फिर विधिक/नियम से स्नातक तक सीमित शिक्षक शोध-प्रकोष्ठ कैसे देख सकते हैं? क्या इस पद हेतु अनुदानित परास्नातक स्तर पर प्रोफेसर्स नहीं हैं?
  3. परिप्रेक्षण अवधि में शिक्षकों को पानी पिलाने की व्यवस्था नहीं होती है।
  4. परिप्रेक्षण और शिक्षण के समय शिक्षकों के बैठने के लिए कुर्सी और मेज स्वच्छ नहीं होता/मिलता है।
  5. शौचालय स्वच्छ नहीं रहता है।गंदगी और बदबू ऐसा कि उल्टी हो जाए और शिक्षक बीमार पड़ जाए।
  6. नए शौचालय के निर्माण की आवश्यकता है।
  7. अनुशासन का काम ऐसे व्यक्ति को मिलना चाहिए, जिसकी स्वीकार्यता सर्वाधिक हो और सक्रियता सकारात्मक हो,जिससे कि कार्य में सहयोग सर्वाधिक मिले। महाविद्यालय में प्रॉक्टोरियल बोर्ड में नई नियुक्ति के कारण असंतोष और अराजकता का माहौल उत्पन्न हो चुका है।
  8. प्रायोगिक परीक्षा के समय नकद एवं अग्रिम भुगतान और अंतिम भुगतान की समस्या।
    अपने महाविद्यालय को छोड़कर सभी महाविद्यालयों ने नकद भुगतान किया। ऑनलाइन भुगतान की माँग महाविद्यालय स्वयं करे, बड़ा सवाल बन जाता है।
  9. महाविद्यालय प्रशासन द्वारा शिक्षकों के साथ चयनात्मक व्यवहार और विभेद।
  10. बी.एस.सी. इन फिजिकल एडुकेशन, हेल्थ एडुकेशन एंड स्पोर्ट्स के साथ-साथ पर्यावरण विज्ञान में प्रवेश एवं परीक्षा से जुड़ी समस्या।
  11. शोध से जुड़ी समस्याएँ।शोध-कार्य एवं शोध-प्रबंध जमा कराने हेतु सकारात्मक पहल और नियमसंगत सहूलियत के स्थान पर कुछ शिक्षकों के साथ निजी कारणों के कारण अवरोध उत्पन्न करने की प्रवृत्ति का देखा जाना।
  12. परीक्षा विभाग के कार्य में प्राचार्य जी के अलावा कोई अन्य हस्तक्षेप न करे, स्वायत्तता और पूर्ण गोपनीयता सुनिश्चित करें।परीक्षा समिति में कार्य करने वाले शिक्षक साथियों के समक्ष समस्या उत्पन्न नहीं की जानी चाहिए।

मैं राजनीति और नियति नहीं जानता, सिर्फ नीति और नीयत जानता हूँ, आप सभी से महामंत्री हूँ, आपका साथ नहीं हैं तो सिर्फ मनोज हूँ, लेकिन मैं अपनी तरफ से आपके साथ और महाविद्यालय प्रशासन के सामने अंत तक हूँ🙏🏻

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