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छुटकी की चिट्ठी, मां के नाम

लघु कथा प्रकृति के आगमन से घर में यदि कोई बहुत ही उत्साहित था, कोई निश्चिंतता की पराकाष्ठा तक प्रसन्न था तो वह रुनझुन थी। मां खुश भी थी और नाराज़ भी। कभी गोद में हाथ-पांव फेंकती नन्हीं सी जान की ठोढ़ी पकड़ पुचकारती और कहती- तू आयी तो पापा प्रोफेसर हो गये। मां के मुस्कराते चेहरे को देख वह भी खिलखिला उठती। कभी मां ने हल्के से कान अमेठते

sonu shood

सोनू सूद जिस प्रकार से भारतीयों की मदद कर रहे हैं उस तरह से तो लगता है कि वह जल्द ही देवी देवताओं की तरह पूजे जाने लगेंगे और पूजना भी चाहिए। भारत में ज्यादा लोगों की छोटी परेशानियां है। इनको दूर करने के लिए प्रशासन और सरकार कभी आगे नहीं आती है। उनकी छोटी जरूरतों को किसी एक ने जब पूरा करना स्टार्ट किया तो पूरी देश की हुजूम